भगवान आदिनाथ ने इसी रायण वृक्ष के नीचे ध्यान लगाया था। यह स्थान अत्यंत प्राचीन और ऊर्जावान माना जाता है। यहाँ चैत्यवंदन करने से साधक को वैराग्य और ध्यान की शक्ति प्राप्त होती है।
यह चैत्यवंदन शत्रुंजय पर्वत की तलहटी (शुरुआत) में किया जाता है।
इस वंदन में श्रद्धालु व्रत लेता है- "आज पूरे दिन मैं बोलूंगा तो केवल प्रभु का नाम, खाऊंगा तो संयम से, और सोचूंगा तो केवल आत्मा की शुद्धि।"
नीलुडी रायण तरु तले, सुन सुंदरी;पीलुडा प्रभुना पाय रे, गुण मंजरी।उज्ज्वल ध्याने ध्याइये, सुन...एहीज मुक्ति उपाय रे।शीतल छाया दे बेसिए, सुन...रातडो करी मन रंग रे।
पर्वत शिखर पर स्थित श्री शांतिनाथ मंदिर। हिंदी पाठ: